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By admin: Jan. 21, 2023

1. भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए सात सदस्यीय समिति गठित

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भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रमुख पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) द्वारा सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।

खबर का अवलोकन 

  • भारतीय ओलंपिक संघ ने अपनी कार्यकारी परिषद की बैठक में यह निर्णय लिया, जिसमें आईओए अध्यक्ष पीटी उषा और संयुक्त सचिव कल्याण चौबे के अलावा अभिनव बिंद्रा और योगेश्वर जैसे खिलाड़ियों ने भाग लिया।

  • आईओए द्वारा गठित सात सदस्यीय समिति में अनुभवी महिला मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम, पहलवान योगेश्वर दत्त, तीरंदाज डोला बनर्जी और भारतीय भारोत्तोलन महासंघ के अध्यक्ष सहदेव यादव के अलावा दो वकील तलिश रे और श्लोक चंद्र और पूर्व शटलर अलकनंदा अशोक शामिल हैं।

मामला क्या है ?

  • बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट और साक्षी मलिक के साथ भारत के 30 पहलवानों ने कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाए।

  • पहलवानों ने बृजभूषण पर मनमानी तरीके से कुश्ती संघ चलाने और कई प्रतियोगिताओं में पहलवानों के साथ कोच नहीं भेजने और विरोध करने पर धमकी देने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए हैं I 

  • विनेश फोगाट ने बृजभूषण  पर लड़कियों के शोषण का आरोप लगाया है I 

  • पहलवानों ने कई दिनों तक दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दिया और डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष के खिलाफ जांच के लिए एक समिति के गठन की मांग की।

पहलवानों की मांग

  • आईओए से यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच के लिए तुरंत एक समिति गठित करने का आग्रह किया I 

  • डब्ल्यूएफआई को भंग करने की मांग I 

  • पहलवानों ने डब्ल्यूएफआई के अध्यक्ष को बर्खास्त करने की मांग की I  

  • डब्ल्यूएफआई का कामकाज देखने के लिये पहलवानों की सलाह से एक नयी समिति गठित की जानी चाहिए I 


By admin: Jan. 7, 2023

2. सरकार ने लद्दाख की संस्कृति, भाषा और रोजगार की रक्षा के लिए समिति गठित की

Tags: committee

Government Formed Committee to Protect Ladakh Culture, Language & Employment

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में लद्दाख की अनूठी संस्कृति, भाषा और रोजगार की रक्षा के उपायों पर चर्चा करने के लिए हाल ही में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया है।

खबर का अवलोकन 

  • गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की अध्यक्षता में 17 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।

  • उच्च स्तरीय समिति में सदस्य - लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर आरके माथुर, सांसद जामयांग त्सेरिंग नामग्याल, लेह और कारगिल हिल काउंसिल के अध्यक्ष, एपेक्स बॉडी लेह के प्रतिनिधि, कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस और गृह मंत्रालय के नामित अधिकारी।

  • समिति लद्दाख की भौगोलिक स्थिति और सामरिक महत्व को देखते हुए संस्कृति और भाषा के संरक्षण पर चर्चा करेगी।

  • इसके अलावा लोगों के लिए भूमि और रोजगार की सुरक्षा, समावेशी विकास, रोजगार सृजन और लेह और कारगिल की लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों के सशक्तिकरण से संबंधित उपायों पर भी चर्चा होगी।

समिति की आवश्यकता 

  • लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग लगातार बढ़ रही है।

  • लद्दाख में नागरिक समाज समूह पिछले तीन वर्षों से भूमि, संसाधन और रोजगार की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

  • राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने सिफारिश की है कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए।

  • मांग के पीछे मुख्य कारण यह है कि लद्दाख की 90% से अधिक आबादी आदिवासियों की है।

  • लद्दाख क्षेत्र में ड्रोकपा, बलती और चांगपा जैसे समुदायों के कई विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत हैं, जिन्हें संरक्षित और बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

संविधान की छठी अनुसूची

  • संविधान के अनुच्छेद 244 के तहत छठी अनुसूची स्वायत्त विकास परिषदों के निर्माण के माध्यम से जनजातीय आबादी की स्वायत्तता की रक्षा करती है। 

  • यह भूमि, सार्वजनिक स्वास्थ्य और कृषि पर कानून बना सकती है।

  • अब तक, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में दस स्वायत्त परिषदें मौजूद हैं।


By admin: Dec. 26, 2022

3. एवीजीसी टास्क फोर्स ने बजटीय परिव्यय के साथ राष्ट्रीय एवीजीसी मिशन की सिफारिश की

Tags: committee National

AVGC Task Force Report calls for National AVGC Mission with budgetary outlay

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा गठित एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग एंड कॉमिक (एवीजीसी) टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव अपूर्वा चंद्रा की  अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स का गठन अप्रैल 2022 में किया गया था।

इस टास्क फोर्स  में कर्नाटकमहाराष्ट्र, तेलंगाना की राज्य सरकारों के सदस्य, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद जैसे शिक्षा निकायों के प्रमुख और उद्योग निकायों के प्रतिनिधि - एमईएससी (मीडिया और मनोरंजन कौशल परिषद), फिक्की (फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) और सीआईआई (कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज) शामिल थे।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2022-23 में एवीजीसी पर एक टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की थी ताकि हमारे बाजारों और वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए घरेलू क्षमता का निर्माण करने के लिए हस्तक्षेप की पहचान की जा सके।

टास्क फोर्स की कुछ प्रमुख सिफारिशें

  • सूचना और प्रसारण मंत्रालय को सौंपी गई एक विस्तृत रिपोर्ट में टास्क फोर्स ने कुछ उपायों की सिफारिश की है। कुछ सुझाव इस प्रकार हैं;
  • सरकार भारत में, भारत के लिए और विश्व के लिए सामग्री निर्माण पर विशेष ध्यान देने के साथ 'क्रिएट इन इंडिया' अभियान शुरू करे।
  • एवीजीसी क्षेत्र के एकीकृत संवर्धन और विकास के लिए एक राष्ट्रीय एवीजीसी-एक्सआर मिशन स्थापित किया जाये ।
  • सरकार इस क्षेत्र के लिए एक राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करे ।
  • स्थानीय उद्योगों तक पहुंच प्रदान करने और स्थानीय प्रतिभा और सामग्री को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों के सहयोग से क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाये।
  • स्कूल स्तर पर समर्पित एवीजीसी पाठ्यक्रम सामग्री के साथ रचनात्मक सोच विकसित करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लाभ उठाया जाए ताकि मूलभूत कौशल का निर्माण किया जा सके और करियर विकल्प के रूप में एवीजीसी के बारे में जागरूकता पैदा की जा सके।
  • अटल टिंकरिंग लैब्स की तर्ज पर शैक्षणिक संस्थानों में एवीजीसी एक्सेलेरेटर और इनोवेशन हब स्थापित करने की भी सिफारिश की गई है।
  • विश्व स्तर पर भारतीय संस्कृति और विरासत को बढ़ावा देने के लिए देश से घरेलू सामग्री निर्माण के लिए एक समर्पित उत्पादन कोष स्थापित किया जाये।


By admin: Dec. 23, 2022

4. सुप्रीम कोर्ट परिसर में विकलांगों के लिए पहुंच ऑडिट करने के लिए एक समिति का गठन

Tags: committee National Person in news

The committee which was set up on 22 December 2022 will be headed by the Supreme Court Judge S Ravindra Bhat.

भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने विकलांगों के अनुकूल बनाने के लिए शीर्ष अदालत परिसर की "भौतिक और कार्यात्मक पहुंच" का लेखा परीक्षा करने के लिए एक समिति की स्थापना की है।

 22 दिसंबर 2022 को गठित की गई समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एस रवींद्र भट करेंगे।

समिति सुगम्यता ऑडिट, विकलांग व्यक्तियों के सर्वेक्षण के परिणाम और पहुंच में आने वाली बाधाओं को दूर करने की दिशा में सिफारिशों/प्रस्तावों पर एक रिपोर्ट तैयार करेगी।

समिति के अन्य सदस्यों में प्रोफेसर डॉ संजय जैन, नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु , शक्ति मिश्रा, शीर्ष अदालत से नामित लाइब्रेरियन, वी श्रीधर रेड्डी, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा नामित वकील और स्वतंत्र अभिगम्यता विशेषज्ञ निलेश सिंगित, सेंटर फॉर डिसएबिलिटी स्टडीज (एनएएलएसएआर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ) द्वारा नामित विशेषज्ञ शामिल हैं।


By admin: Dec. 17, 2022

5. मध्य प्रदेश सरकार ने ऑनलाइन जुआ और खेल के नियमन की सिफारिश करने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया

Tags: committee Person in news State News

M P government set up a task force to recommend regulation of online gambling and gaming

16 दिसंबर 2022 को जारी एक आदेश में मध्य प्रदेश सरकार ने एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है, जो तकनीकी और कानूनी पहलुओं की जांच करने के बाद राज्य में ऑनलाइन गैंबलिंग और गेमिंग को विनियमित करने के बारे में राज्यसरकार को सिफारिशें करेगी।

इस टास्क फोर्स का नेतृत्व राज्य के मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस करेंगे।

टास्क फोर्स का गठन विभिन्न न्यायिक मिसालों, कानूनी स्थितियों और ऑनलाइन जुआ और गेमिंग की रोकथाम और नियंत्रण से संबंधित तकनीकी पहलुओं की जांच करने और राज्य सरकार को सिफारिशें करने के लिए किया गया है।

राज्य में कई ऐसी घटनाएं सामने आने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया, जहां ऑनलाइन गेम के आदी बच्चे माता-पिता द्वारा डांटे जाने के बाद आत्महत्या कर रहे थे।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री: शिवराज सिंह चौहान


By admin: Dec. 6, 2022

6. केंद्र ने बांस क्षेत्र के विकास को सुव्यवस्थित करने के लिए सलाहकार समूह के गठन को मंजूरी दी

Tags: committee

Centre approves formation of Advisory Group for streamlining development of Bamboo sector

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बांस क्षेत्र के विकास को सुव्यवस्थित करने के लिए एक सलाहकार समूह के गठन को मंजूरी दी है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • केंद्रीय कृषि सचिव राष्ट्रीय बांस मिशन के अध्यक्ष और मिशन निदेशक समिति के संयोजक होंगे।

  • सलाहकार समूह में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नवोन्मेषकों, प्रगतिशील उद्यमियों, डिजाइनरों, किसान नेताओं, विपणन विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं सहित विभिन्न हितधारकों का प्रतिनिधित्व है।

  • बांस मूल्य श्रृंखला से संबंधित सभी वर्गों के बीच तालमेल के साथ बांस क्षेत्र के विकासात्मक ढांचे को सुधारने में मदद करने के लिए अंतर-मंत्रालयी और सार्वजनिक-निजी परामर्श की परिकल्पना की गई है।

राष्ट्रीय बांस मिशन

  • इसे 2018-19 के दौरान केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में लॉन्च किया गया था।

  • इसे एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) की उप-योजना के रूप में कार्यान्वित किया जा रहा है।

  • कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय का कृषि और सहकारिता विभाग (DAC) इसके कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी है।

  • यह मिशन क्षेत्र आधारित, क्षेत्रीय रूप से विभेदित रणनीति को अपनाकर और बांस की खेती और विपणन के तहत क्षेत्र को बढ़ाने के लिए बांस क्षेत्र के समग्र विकास को बढ़ावा देने की परिकल्पना करता है।


By admin: Dec. 2, 2022

7. भारत सरकार ने भारत में सामान्य मानक चार्जर को अपनाने के लिए एक समयरेखा निर्धारित करने के लिए एक पैनल का गठन किया

Tags: committee Person in news

panel to set a timeline for adoption of common standard charger in India

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत उपभोक्ता मामले विभाग ने स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप सहित इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए यूएसबी टाइप-सी को मानक चार्जिंग पोर्ट के रूप में अपनाने के लिए एक समयरेखा निर्धारित करने के लिए एक समिति का गठन किया है।

समिति की अध्यक्षता उपभोक्ता मामलों के विभाग में अतिरिक्त सचिव निधि खरे करेंगी।

सिंगल चार्जर की जरूरत क्यों?

एक ग्राहक को विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों जैसे फीचर फोन, स्मार्ट फोन, लैपटॉप, टैबलेट आदि के लिए विभिन्न प्रकार के चार्जर खरीदने पड़ते हैं। जब ग्राहक फोन या लैपटॉप का नया मॉडल खरीदता है तो बहुत सारा ई-कचरा उत्पन्न होता है क्योंकि उन्हें एक नया चार्जर खरीदना पड़ता है और पुराना  फेंकना पड़ता है ।

ई-कचरे को कम करने के लिए सरकार चाहती है की इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए सिर्फ एक ही चार्जर हो ताकि ग्राहकों को हर बार नया इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद खरीदते समय चार्जर न बदलना पड़े।

यूएसबी टाइप सी चार्जर क्यों?

यूएसबी (यूनिवर्सल सीरियल बस) टाइप सी चार्जर में तेज चार्जिंग क्षमता होती है और इसका उपयोग कई इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए भी किया जा सकता है, जिनके लिए 65 वाट या उससे कम की चाग्रिन क्षमता की आवश्यकता होती है।इससे लगभग हर इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों जैसे फीचर फोन, स्मार्ट फोन, लैपटॉप, टैबलेट आदि को आराम से चार्ज किया जा सकता है ।

हाल ही में यूरोपीय संघ ने 2024 तक छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए एक सामान्य चार्जर अपनाने की घोषणा की है।

भारत दुनिया में चार्जर्स के सबसे बड़े निर्माताओं और निर्यातकों में से एक है।


By admin: Dec. 1, 2022

8. किरीट पारेख पैनल ने 1 जनवरी 2026 से गैस की कीमतों को पूरी तरह से नियंत्रण मुक्त करने का सुझाव दिया है

Tags: committee Economy/Finance

Kirit Parekh panel suggest complete deregulation of Gas prices from 1 January 2026

भारत में गैस मूल्य निर्धारण फॉर्मूले की समीक्षा के लिए भारत सरकार द्वारा गठित किरीट पारेख पैनल ने 30 नवंबर को भारत सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।पैनल ने 1 जनवरी, 2026 से  भारत में गैस की कीमतों को नियंत्रण मुक्त करने के लिए कई सिफारिशें की हैं।

सितंबर में, सरकार ने उचित मूल्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से देश में उत्पादित गैस के लिए गैस मूल्य निर्धारण फार्मूले की समीक्षा करने के लिए ऊर्जा विशेषज्ञ और पूर्व योजना आयोग (जिसका नाम बदलकर नीति आयोग रखा गया है) के सदस्य किरीट पारिख के नेतृत्व में समिति का गठन किया था।

मुद्दे की पृष्ठभूमि

भारत दुनिया में गैस का एक प्रमुख आयातक है लेकिन भारत में कुछ ऐसे गैस क्षेत्र हैं जो प्राकृतिक गैस का उत्पादन करते हैं।

भारत में मोटे तौर पर दो प्रकार के गैस क्षेत्र हैं।

एक को विरासत गैस क्षेत्र कहा जाता है ।  ये वे गैस क्षेत्र हैं जो सरकार के स्वामित्व वाली ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) को आवंटित किए गए थे। इन क्षेत्रों से उत्पादित गैसों की कीमत सरकार द्वारा तय की जाती है और उपभोक्ताओं को अत्यधिक रियायती मूल्य पर प्रदान की जाती है।

साथ ही ओएनजीसीऔर ओआईएल न तो सरकार को कोई रॉयल्टी देते हैं और न ही सरकार के साथ अपना लाभ साझा करते हैं। ऐसे क्षेत्र से उत्पादित गैस का  भारत के वार्षिक गैस उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा हैं।

अन्य गैस क्षेत्र

अन्य गैस क्षेत्रों का स्वामित्व रिलायंस, वेदांता जैसी निजी कंपनियों के पास है। उन्हें सरकार को रॉयल्टी देनी  होती है । इन गैस क्षेत्रों में मूल्य निर्धारण की स्वतंत्रता है लेकिन अधिकतम मूल्य सरकार द्वारा तय किया जाता है।

पारेख समिति की सिफारिश

  • विरासत गैस क्षेत्र के लिए इसने न्यूनतम मूल्य $ 4 प्रति मीट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) और अधिकतम मूल्य  $ 6.5/एमएमबीटीयू की सिफारिश की है।
  • इसने हर साल अधिकतम मूल्य की  सीमा को 0.5 अमेरिकी डॉलर/एमएमबीटीयू बढ़ाने की भी सिफारिश की है। इसे 1 जनवरी 2027 से लागू करने का प्रस्ताव है।
  • अन्य गैस क्षेत्र के लिए इसने सिफारिश की है कि 1 जनवरी 2026 से अधिकतम मूल्य  सीमा को हटा दिया जाये । इससे उन्हें मूल्य निर्धारित करने और विपणन रणनीति बनाने की पूर्ण स्वतंत्रता मिलेगी।
  • समिति ने गैस के मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता लाने के लिए प्राकृतिक गैस को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने की भी सिफारिश की है।

भारत में गैस मूल्य तंत्र

सरकार गैस की कीमत प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल और 1 अक्टूबर को अमेरिका, कनाडा और रूस जैसे गैस-अधिशेष देशों में प्रचलित दरों के आधार पर एक वर्ष में एक तिमाही के अंतराल के साथ निर्धारित करती है।


By admin: Nov. 29, 2022

9. सेबी ने कॉरपोरेट टेकओवर नियमों की समीक्षा के लिए जस्टिस शियावैक्स जल वज़ीफ़ादार की अध्यक्षता में एक पैनल का गठन किया

Tags: committee Economy/Finance

SEBI forms a panel headed by Justice Shiavax Jal Vazifadar

पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) ने मौजूदा कॉर्पोरेट अधिग्रहण नियमों की समीक्षा के लिए 20 सदस्यीय उच्च स्तरीय पैनल का गठन किया है। 20 सदस्यीय पैनल की अध्यक्षता पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश शियावक्स जल वज़ीफ़ादार करेंगे।

अधिग्रहण संहिता की आखिरी समीक्षा 2009 में अच्युतन समिति द्वारा की गई थी।

पैनल का कार्य

पैनल मौजूदा कॉरपोरेट टेकओवर नियमों की समीक्षा करेगा और न्यायिक घोषणाओं

और सर्वोत्तम वैश्विक प्रथाओं को ध्यान में रखते हुए इसमें बदलाव का सुझाव देगा। यह भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को सुविधाजनक बनाने के उपायों का सुझाव देगा।

भारत में कॉरपोरेट टेक ओवर कोड

निजी क्षेत्र और विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था के खुलने के साथ, एक नियम बनाने की आवश्यकता महसूस की गई जो कंपनियों के विलय और अधिग्रहण के मामले में पारदर्शिता को बढ़ावा देगा।

सेबी ने 1994 में कंपनियों के विलय और अधिग्रहण  के लिए पहला व्यापक कोड बनाया, जिसे भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) (शेयरों और अधिग्रहणों का पर्याप्त अधिग्रहण) विनियम कहा जाता है।

कोड में दो बार महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है।

न्यायमूर्ति पी एन भगवती समिति की सिफारिश पर 1997 में इसमें संशोधन किया गया था।

कॉरपोरेट अधिग्रहण पर 2009 की अच्युतन समिति की सिफारिश पर सेबी द्वारा 2011 में कोड में फिर से संशोधन किया गया।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी)

भारत सरकार के एक संकल्प के माध्यम से 12 अप्रैल, 1988 को एक गैर-सांविधिक निकाय के रूप में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड का गठन किया गया था।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड की स्थापना वर्ष 1992 में एक वैधानिक निकाय के रूप में हुई थी और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के प्रावधान 30 जनवरी, 1992 को लागू हुए थे।

यह भारत में पूंजी और कमोडिटी बाजार का नियामक है।

मुख्यालय: मुंबई

वर्तमान अध्यक्ष : माधाबी पूरी बूच


By admin: Nov. 26, 2022

10. मनरेगा रोजगार गारंटी योजना में सुधार के लिए केंद्र ने समिति गठित की

Tags: committee

revamp MGNREGA job guarantee scheme

केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना में सुधार के लिए एक समिति का गठन किया है। यह समिति गरीबी उन्मूलन के साधन के तौर पर मनरेगा की प्रभावकारिता को परखेगी। 

महत्वपूर्ण तथ्य

  • पूर्व ग्रामीण विकास सचिव अमरजीत सिन्हा की अध्यक्षता वाली इस समिति की पहली बैठक 21 नवंबर को हुई थी। 

  • इसे अपने सुझाव देने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है।

  • समिति को मनरेगा में काम मांग, खर्च के तरीके, अलग-अलग राज्यों में मांग में अंतर और योजना की शुरुआत के बाद से रोजगार मुहैया कराने की बढ़ी लागत की समीक्षा करने को कहा गया है। 

  • साथ ही यह समिति सुझाव देगी कि इस योजना को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए क्या बदलाव किए जा सकते हैं।

  • समिति को गरीब इलाकों में इस योजना को बेहतर तरीके से लागू करने की सिफारिशें भी सौंपनी होंगी।

  • इस योजना को ग्रामीण इलाकों में गरीबी उन्मूलन के साधन के तौर पर लाया गया था, लेकिन उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्य, जहां गरीबी का स्तर ज्यादा है, वहां इस योजना का उचित लाभ नहीं मिल पाया है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना

  • नरेगा अधिनियम 23 अगस्त 2005 को भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया था, लेकिन यह 6 फरवरी, 2006 को लागू हुआ। 

  • 2 अक्टूबर 2009 को राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 में एक संशोधन किया गया, जिससे अधिनियम का नाम नरेगा से बदलकर कर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एमजीएनआरईजीए) कर दिया गया। 

  • मनरेगा  में प्रत्येक ग्रामीण परिवार जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य करने के लिए स्वेच्छा से तैयार हैं  उनको एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों की गारंटी मजदूरी रोजगार प्रदान करना है। 

  • यह योजना केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री - गिरिराज सिंह


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