बच्चों में एनीमिया: के लिए बाल विकास की असफलता

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2019-2021 के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) की 5वीं रिपोर्ट के अनुसार, NFHS-4 (2015-2016) की तुलना में 6 से 59 महीने की आयु के बच्चों का उच्च अनुपात एनीमिक पाया गया है।

मुख्य विशेषताएं:

  • एनएफएचएस -5 (2019-21) में एनीमिया से पीड़ित बच्चों की हिस्सेदारी एनएफएचएस -4 (2015-16) की तुलना में 8.5% अंक की वृद्धि हुई और एनएफएचएस -3 (2005-2006) के स्तर के करीब थी।
  • 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में से 30 में 6-59 महीने के आयु वर्ग के आधे बच्चे एनीमिक पाए जाते हैं।
  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कई उत्तर और पश्चिमी राज्यों में बच्चों की उच्च हिस्सेदारी एनीमिक पाई गई।
  • असम, मिजोरम और छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई।
  • गुजरात में सबसे ज्यादा बच्चे (79.7%) एनीमिया से पीड़ित थे।

एनएफएचएस-5 . के अनुसार 6-59 माह की आयु के बच्चों का राज्यवार प्रतिशत जो रक्ताल्पता से ग्रस्त थे

लद्दाख - 92.5%

मध्य प्रदेश - 72.7%

राजस्थान - 71.5%

उत्तर प्रदेश - 66.4%

गुजरात - 79.7%

बिहार - 69.4%

केरल - 39.4%

तमिलनाडु 57.4%

एनीमिया होने का करण:-

खून की कमी एनीमिया शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी या निष्क्रिय लाल रक्त कोशिकाओं के कारण होता है। इससे शरीर के अंगों में ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है।

 थकान, त्वचा का पीलापन, सांस लेने में तकलीफ, सिर चकराना, चक्कर आना या तेज़ दिल की धड़कन  इसके लक्षणों में शामिल होता हैं।

 

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित एक देशव्यापी सर्वेक्षण है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान नोडल एजेंसी के रूप में कार्यरत है।

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