मनरेगा रोजगार गारंटी योजना में सुधार के लिए केंद्र ने समिति गठित की

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revamp MGNREGA job guarantee scheme

केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना में सुधार के लिए एक समिति का गठन किया है। यह समिति गरीबी उन्मूलन के साधन के तौर पर मनरेगा की प्रभावकारिता को परखेगी। 

महत्वपूर्ण तथ्य

  • पूर्व ग्रामीण विकास सचिव अमरजीत सिन्हा की अध्यक्षता वाली इस समिति की पहली बैठक 21 नवंबर को हुई थी। 

  • इसे अपने सुझाव देने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है।

  • समिति को मनरेगा में काम मांग, खर्च के तरीके, अलग-अलग राज्यों में मांग में अंतर और योजना की शुरुआत के बाद से रोजगार मुहैया कराने की बढ़ी लागत की समीक्षा करने को कहा गया है। 

  • साथ ही यह समिति सुझाव देगी कि इस योजना को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए क्या बदलाव किए जा सकते हैं।

  • समिति को गरीब इलाकों में इस योजना को बेहतर तरीके से लागू करने की सिफारिशें भी सौंपनी होंगी।

  • इस योजना को ग्रामीण इलाकों में गरीबी उन्मूलन के साधन के तौर पर लाया गया था, लेकिन उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्य, जहां गरीबी का स्तर ज्यादा है, वहां इस योजना का उचित लाभ नहीं मिल पाया है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना

  • नरेगा अधिनियम 23 अगस्त 2005 को भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया था, लेकिन यह 6 फरवरी, 2006 को लागू हुआ। 

  • 2 अक्टूबर 2009 को राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 में एक संशोधन किया गया, जिससे अधिनियम का नाम नरेगा से बदलकर कर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एमजीएनआरईजीए) कर दिया गया। 

  • मनरेगा  में प्रत्येक ग्रामीण परिवार जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य करने के लिए स्वेच्छा से तैयार हैं  उनको एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों की गारंटी मजदूरी रोजगार प्रदान करना है। 

  • यह योजना केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री - गिरिराज सिंह


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