एनजीटी ने कचरे के प्रबंधन में विफल रहने के लिए पंजाब पर 2180 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पंजाब सरकार पर ठोस और तरल कचरे के उपचार में विफलता के लिए 2,180 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है, जिससे उनके उत्पादन और उपचार में भारी अंतर है।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए के गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि, सुधारात्मक कार्रवाई अनिश्चित काल तक इंतजार नहीं कर सकती और स्वास्थ्य मुद्दों को लंबे समय तक टाला नहीं जा सकता।

पीठ ने  कहा कि अपशिष्ट प्रबंधन के विषय पर पर्यावरणीय मानदंडों का अनुपालन प्राथमिकता पर होना चाहिए। इसके लिए सरकार को फंड मुहैया कराना होगा।

इसने राज्य सरकार से जुर्माने की राशि एक अलग कोष में जमा करने को कहा, जिसका उपयोग कचरे के उपचार के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए किया जाएगा।

एनजीटी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा नगर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 और अन्य पर्यावरणीय मुद्दों के अनुपालन की निगरानी कर रहा है।


महत्वपूर्ण तथ्य - 

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल/राष्ट्रीय हरित अधिकरण :

  • यह पर्यावरण संरक्षण और वन के संरक्षण से संबंधित मामलों  का निपटारा करता है ।
  • इसे राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम 2010 के तहत 2010 में स्थापित किया गया था।
  • यह अधिकरण 1908 के नागरिक कार्यविधि के द्वारा दिए गए कार्यविधि से प्रतिबद्ध नहीं है लेकिन प्राकृतिक  न्याय सिद्धांतों से निर्देशित होगा।
  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण का मुख्यालय : नई दिल्ली
  • भोपाल, पुणे, कोलकाता और चेन्नई  में इसके बेंच हैं ।
  • अध्यक्ष : न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल

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